पदार्थ विद्या का अर्थ
[ pedaareth videyaa ]
पदार्थ विद्या उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- वह विद्या जिससे लौकिक वस्तुओं के विषय में जानकारी प्राप्त हो :"अपरा विद्या को परा विद्या से निम्न स्तर का माना जाता है"
पर्याय: अपरा विद्या, लौकिक विद्या, अपरा-विद्या, पदार्थ-विद्या, लौकिक-विद्या, अपरा
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- वे सभी सत्य है पदार्थ विद्या (
- सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं , उन सबका आदिमूल परमेश्वर है।
- १ . सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है।
- 1 . सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है।
- सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते है , उन सब का आदि मूल परमेश्वर है .
- वेदों के इन्हीं लक्षणों के कारण वेदों के प्रकाण्ड विद्वान् महर्षि दयानन्द ने कहा “सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं , उनका आदि मूल परमेश्वर है।
- वेदों के इन्हीं लक्षणों के कारण वेदों के प्रकाण्ड विद्वान् महर्षि दयानन्द ने कहा ' ' सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं , उनका आदि मूल परमेश्वर है।
- [ 9 ] चूँकि वेद , वार्ता तथा दण्डनीति से भिन्न चतुर्थी विद्या के रूप में इसकी प्रतिष्ठा है , अत : इसके असाधारण प्रतिपाद्य उक्त संशय आदि चौदह पदार्थ विद्या के अपने असाधारण प्रतिपाद्य होते हैं।
- जब गुरु सेवा से प्रसन्न होता है तब जैसे कुञ्जियों से ताला खोलकर मकान के सब पदार्थ झट देखने में आते हैं , वैसे ऐसी युक्ति बतला देते हैं कि हृदय के कपाट खुल जाकर सब पदार्थ, विद्या तत्क्षण आ जाती है ।
- दो मन्तव्यों पर उनका दृढ़ विश्वास था - ( 1 ) प्रथम तो यह कि जो विद्या या पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उनका आदिमूल परमेश्वर है और इस विद्या का ज्ञान पुरुषों को परमात्मा से वेदों के द्वारा ही मिला है ।